इतिहास : 50 साल के संघर्ष के बाद कैसे बना तेलंगाना राज्य

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1 नवंबर 1956 को जब राज्य पुनर्गठन आयोग की सिफारिश के बाद Hyderabad प्रांत को आंध्र प्रदेश में मिला दिया गया । यह हिस्सा आर्थिक शैक्षणिक एवं अन्य सभी क्षेत्रों में राज्य के बाकी क्षेत्रों की तुलना में काफी पिछड़ा था। जिसके कारण इस क्षेत्र के साथ अनदेखी हुई उसके बाद Telangana को अलग राज्य बनाने की मांग उठने लगी ।

source – BBC

नया राज्य बनने की सिर्फ 13 साल बाद यानी 1969 मॆ पहला बड़ा आंदोलन हुआ तब से 2013 तक आंदोलन होते रहे। आंदोलन की बात करें तो 1969 , 1972 अौर 2009 में बड़े आन्दोलन हुए । 1969 में  ‘ जय तेलंगाना ‘ आंदोलन इतना हिंसक हो उठा कि करीब 300 लोगों की मौत हो गई फिर भी कोई समझौता नहीं हो पाया जिसे नए राज्य की मांग और तेज हो गई और 1972 में ‘ जय आंध्रा ‘ आंदोलन हुआ ।

Andhra Pradesh , Hyderabad , Telangana
source – Navajivan

1998 के जनरल इलेक्शन भारतीय जनता पार्टी ‘ एक मत – दो राज्य ‘ का नारा देकर नए राज्य की मांग का समर्थन किया। और 2009 के जनरल इलेक्शन भारतीय जनता पार्टी ने यह घोषणा कर दिया कि अगर हो सकता में आती है तो नए राज्य का गठन करेगी । 

29 नवंबर 2009 को तेलंगाना राष्ट्र समिति के प्रमुख चंद्रशेखर राव ने भूख हड़ताल शुरू कर दी जिससे तत्कालीन केंद्र सरकार उन्हें आश्वासन देकर 11 दिन बाद भूख हड़ताल खत्म करवाई। 10 फरवरी 2010 को जस्टिस श्रीकृष्ण के नेतृत्व में 5 सदस्यों की कमेटी  गठन की गई। जो दिसंबर 2010 में केंद्र सरकार को रिपोर्ट सौंपी। अौर 3 अक्टूबर 2013 को तेलंगाना राज्य के गठन को मंजूरी दी।

2014 के जनरल इलेक्शन के साथ दोनों राज्य आंध्र प्रदेश और तेलंगाना की विधानसभा के चुनाव साथ में संपन्न हुआ 2 जून 2014 को तेलंगाना राज्य औपचारिक रूप से आकार लिया और के चंद्रशेखर राव राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री बने। 10 साल के लिए हैदराबाद को दोनों राज्यों की राजधानी घोषित की गई।

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